पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर : आज राजधानी के रायपुर प्रेस क्लब में भाजपा के वयोवृद्ध भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि राज्य के दो बड़े जिले कोरबा और दंतेवाड़ा में 10 हजार करोड़ रू से अधिक का डी.एम.एफ. और सी.एस.आर. मद में भष्ट्राचार हुआ है। उन्होंने सीधे राज्य के दो आई.ए.एस अधिकारी वर्तमान कोरबा कलेक्टर अजीत बंसत और तत्कालीन कोरबा कलेक्टर संजीव कुमार झा पर डी.एम.एफ एवं सी.एस.आर. मद में करोड़ों रुपए के घोटाले और भष्ट्राचार का आरोप लगाया है।
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इसके साथ ही इस पूरे मामले की जांच के लिए केन्द्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कोयला एवं खान मंत्री किशन रेड्डी सहित सी.बी.आई. और ई.डी. प्रमुख को पत्र लिखा है। उन्होंने एस.ई.सी.एल. की दीपिका, कुसमुंडा, गेवरा सहित अन्य जगहों पर किये गये भूमि-अधिग्रहण के पश्चात भू-विस्थापितों के मुआवजे और व्यवस्थापन के लिए प्रधानमंत्री एवं केंद्र को पत्र लिखा है। साथ ही उन्होंने ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान में निजी फाइनेंस कंपनीयों द्वारा 40 हजार से ज्यादा आदिवासी महिलाओं के साथ हुए फर्जी लोन और धोखाधड़ी के मामले लिए भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। जिस पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 10 दिसंबर 2024 को छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को संबंधित पूरे मामलों और सूचनाओं पर की गई कार्यवाही से संबंधित सूचना, आयोग में प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया है।
मसला यही से शुरू होता है। 81 वर्षीय वयोवृद्ध भाजपा नेता 1977 में जनसंघ की टिकट से चुनाव जीत कर मध्यप्रदेश विधानसभा पहुंचे थे और तत्कालीन सरकार में उन्हें पहले संसदीय सचिव वित्त एवं उसके बाद उन्हें वित्त राज्यमंत्री का पद दिया गया था। 1990 में पटवा सरकार में भी नंनकीराम ने केबिनेट मंत्री के रूप में वन एवं कृषि मंत्रालय संभाला था। छत्तीसगढ़ गठन के बाद 2008-13 तक मुख्यमंत्री रमन सिंह की केबिनेट में बतौर केबिनेट मंत्री गृह,जेल एवं सहकारिता रह चुके हैं।
पत्रकार वार्ता
इतने वरिष्ठ नेता ने आज पत्रकार वार्ता में पत्रकारों के सवालों के दौरान छिपाकर ही सही अपनी व्यथा प्रदर्शित कर दी। सवालों के दौरान उन्होंने स्पष्ट भी किया कि मुख्यमंत्री सचिवालय को जांच एवं कार्यवाही के लिए प्रेषित पत्र पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। अधिकारियों द्वारा उनके पत्रों को रोका जा रहा है साथ ही उन पर कोई भी कार्यवाही नहीं की जा रही है। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि निश्चित रूप से मेरे पत्रों पर राज्य के अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं करते हैं इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री सहित केंद्र को पत्र लिखा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में भी कोई कार्यवाही नहीं होने पर उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था और केंद्र की मोदी सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्यवाही की जिसमें छत्तीसगढ़ पी.एस.सी. घोटाला, कोयले में अवैध वसूली,शराब में अवैध वसूली और महादेव सट्टा एप के माध्यम से पैसों की अफरातफरी के मामले है। केंद्र सरकार की जांच और कार्यवाही की वजह से आज अनेक राजनेता, अधिकारी और कर्मचारी जेल में हैं।
भाजपा नेता और अफसरो में टकराव
प्रश्न इसलिए ही उठ रहे हैं कि क्या राज्य में अब वरिष्ठ भाजपा नेताओं को हाशिए में ढकेला जा रहा है या अफसरशाही हावी हो कर राज्य को स्वयं चला रहीं हैं? या इससे बड़ा एक यक्ष प्रश्न और है कि क्या राज्य के वित्तीय संसाधनों का दोहन जनता के लिए ना कर स्वयं के लिए किया जा रहा है? मतलब भविष्य में हजारों करोड़ों के और कई घोटाले सामने आयेंगे जैसे पी.एस.सी.,शराब, कोयला और महादेव सट्टा एप?



