पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर : छत्तीसगढ़ डायोसिस, सी. एन. आई. रायपुर को छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ एजुकेशन एवं विद्यालयों से कंट्रीब्यूशन फार डायोसिशन कौंसिल के नाम पर बहुत बडी राशि दी गई है। यह बहुत बडे विवाद का विषय बन गया है। क्योंकि जहां इसी ऐजुकेशन सोसाइटी के कुछ पूर्व सदस्यों और शिक्षकों का यह कहना है कि यह सीधे सीधे गबन है, वहीं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और राजधानी के वरिष्ठ नेता लोकेश कावडिया का कहना है की उक्त राशि का आहरण और उपयोग राज्य मे धर्मांतरण के लिए किया जा रहा है।

इस विषय की जांच के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को एक पत्र भी लिखा है। जबकि संस्था का कहना है कि सभी स्कूल चर्च की संपत्ति मे संचालित हो रहे है जिसका किराया दिया जा रहा है। कुल मिलाकर मामला बहुत ही गंभीर है।

छत्तीसगढ़ गठन के 10 वर्ष पश्चात 2010 में छत्तीसगढ़ डायोसिस और छत्तीसगढ़ डायलिसिस बोर्ड आफ एजुकेशन समिति का गठन किया गया। छत्तीसगढ़ में पंजीयन होने के बाद इस शिक्षण समिति द्वारा छत्तीसगढ़ में 11 स्कूल जो पूर्व में जबलपुर डायोसिस के द्वारा संचालित किये जा रहे थे उन सभी स्कूलों का संचालन इनके द्वारा प्रारंभ कर दिया गया। जब से इस एजुकेशन सोसाइटी के माध्यम से स्कूलों का संचालन शुरू किया गया है तब से लगातार विवाद उत्पन्न हो रहें हैं। 2016 में एक जनहित याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लगाई गई थी। माननीय न्यायालय ने 2 आवेदकों और अनावेदकों के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार के शिक्षा विभाग, चर्च ऑफ नार्थ इंडिया-नई दिल्ली, बोर्ड ऑफ एजुकेशन-जबलपुर डायोसिस, छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन, रायपुर सहित सभी 16 अनावेदकों की दलीलों को सुनने के बाद 2022 में रजिस्ट्रार, फर्म और सोसायटी को छः माह में जांच के लिए आदेश दिया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद रजिस्ट्रार, फर्म और सोसायटी ने तीन सदस्यीय समिति का गठन कर पूरे मामले की जांच की। समिति ने अपने जांच प्रतिवेदन में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखा और संसूचना आदेश जारी किया। जारी आदेश में कहा गया कि छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 की धारा 32(4) के आधार पर आक्षेपित बिंदुओं पर संस्था के पंजीकृत नियमावली के अनुसार पालन करते हुए आवश्यक कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें। आदेश 48 बिंदुओं पर दिया गया है।

प्रथम बिंदु में ही ये लिखा है कि छत्तीसगढ़ डायसिस,सी.एन.आई., रायपुर को छत्तीसगढ़ डायसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन, रायपुर एवं विद्यालयों से कंट्रीब्यूशन फॉर डायसिस काउंसिल हेतु राशि प्राप्त किया जाना पाया गया है। छत्तीसगढ़ डायोसिस को मिशनरी स्कूलों से सीधे 10,60,00/- और छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन, रायपुर से 51,25,000/- प्राप्त हुआ है।

दूसरी बिंदु में यह लिखा गया है कि छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन को संस्था द्वारा संचालित विभिन्न स्कूलों से 97 लाख रुपए प्राप्त हुयें है।
तीसरी बिंदु में बताया गया है कि सात विभिन्न लोगों को 37,37,000/- रुपयों का भुगतान मानदेय के रूप में किया गया। ये भुगतान संस्था की नियमावली XVI के अनुसार नहीं है। इसके साथ ही संसूचना आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन, रायपुर को संस्था द्वारा संचालित विभिन्न स्कूलों से 99.45 लाख रुपए बिल्डिंग यूजर फंड, संबद्धता एवं एडमिनिस्ट्रेशन फंड के रूप में प्राप्त हुये है। साथ ही छत्तीसगढ़ डायोसिस,सी.एन.आई. द्वारा संचालित चर्चों से डायोसिस को जांच अवधि में 7.82 करोड़ रुपए प्राप्त होना पाया गया है। जांच समिति द्वारा जांच की अवधि वर्ष 2011 से वर्ष 2023 तक निर्धारित की गई थी।
क्रमशः पार्ट -2



