पंकज विश्वकर्मा, समाचार संपादक
यज्ञ सिंह ठाकुर/हेमंत गोस्वामी/ पी. प्रसाद
रायपुर/छत्तीसगढ़. 302 सहित 30 से ज्यादा मामलों में आरोपी निगरानी बदमाश ने एक निजी चिकित्सा संस्थान के डायरेक्टर को जबरजस्त तरीके से ब्लैकमेल कर परिवार सहित जान से मारने और अस्पताल को बम से उड़ा देने की धमकी दी। जब डायरेक्टर ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से शिकायत दर्ज कर अपराध पंजीबद्ध करवा दिया तो निगरानी बदमाश ने स्थानीय मीडिया को दिग्भ्रमित कर खुद को पुलिस प्रताड़ना का शिकार बता दिया।

रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 News Channel की टीम भी इस मामले को पुलिस प्रताड़ना की कार्यवाही समझते हुए मामले की पड़ताल के लिए सरगांव पहुंचीं थीं। परंतु गहन पड़ताल में ये पूरा मामला ही अलग निकला। इस पूरे मामले का खुलासा मुंगेली जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल,सरगांव थाना प्रभारी संतोष शर्मा और सहायक उपनिरीक्षक अजय चौरसिया ने किया। उन्होंने बताया कि यह एक निगरानी बदमाश है। साथ ही सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत इस पर दर्ज अपराधों की सूची भी उपलब्ध कराई। उन्होंने ये भी बताया कि स्थानीय मीडिया के समक्ष इसने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और खुद को ही पीड़ित प्रदर्शित किया जबकि पूरा मामला ही कुछ और है।

दरअसल यह पूरा मामला रायपुर -बिलासपुर नेशनल हाईवे नं 130 के सरगांव थाना क्षेत्र का और सितंबर के दूसरे पखवाड़े का है। सरगांव थाना क्षेत्र मुंगेली जिले के हिस्सा और बिलासपुर और मुंगेली जिले के बार्डर में स्थित है। सरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम नारायणपुर में सिद्धि विनायक हास्पिटल के संचालक दिलीप शर्मा को थाना क्षेत्र के ही निगरानी बदमाश दीपक साहू ने फोन पर बगैर ड्रिग्री के अस्पताल संचालित करने के नाम पर ब्लैकमेल कर रुपयों की मांग की। संचालक द्वारा रुपए ना देने की बात पर निगरानी बदमाश दीपक साहू ने परिवार सहित जान से मारने और अस्पताल को बम से उड़ा देने की धमकी दी। जिस पर संचालक दिलीप शर्मा ने जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारी सरगांव को सूचना दी। पुलिस प्रशासन द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया साथ ही प्रतिबंधात्मक धाराओं में दीपक साहू को सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जहां न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया था।

यही से इस अपराधी ने मुंगेली जिला मुख्यालय के पत्रकारों और संवादाताओं को दिग्भ्रमित करके पुलिस प्रशासन को बदनाम करने की साज़िश रची। दरअसल इसके अड़ियल रवैए और हर जगह दादागिरी करने की वजह से जेल में इसकी कैदीयों के साथ मारपीट हुई थी। इसी का फायदा उठाते हुए इसने मिडिया के सामने अपने आप को पुलिस प्रताड़ना का शिकार बता दिया साथ ही दो सहायक उपनिरीक्षक और दो आरक्षकों के ऊपर मनगढ़ंत आरोप लगा दिये। स्थानीय मीडिया भी दिग्भ्रमित हो गई और इसे पुलिस प्रताड़ना का पीड़ित समझ बैठी।

जहां इसका अपराध से बहुत पुराना नाता है वर्ष 2017 में इसके ऊपर सबसे पहले धारा -302/120 के तहत मामला दर्ज किया गया था। थाना सरगांव में ही इसके खिलाफ 26 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं जिसमें अधिकांश गंभीर अपराध है। वहीं थाना हिर्री, बिलासपुर सहित कई अन्य जगहों पर भी इसके खिलाफ आर्म्स एक्ट सहित कई अन्य गंभीर मामले दर्ज हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि पत्रकार निष्पक्ष रूप से समाचार संकलन करते हैं। और इस शातिर अपराधी ने जिले स्तर के पत्रकारों के समक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और आपसी लड़ाई की चोटों को पुलिस द्वारा की गई मारपीट बता दिया।

वहीं नारायणपुर स्थित निजी चिकित्सा संस्थान में ही कार्यरत अभिनव सुभाष उर्फ अभिनव गिलहरे जिसका संबंध दीपक साहू से है और ये खुद को मेकाहारा से 2011 में एम.बी.बी.एस पास डाक्टर बताता है। रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 News Channel के समाचार संपादक पंकज विश्वकर्मा को फोन पर ख़बरें प्रसारित नहीं करने की खुली धमकी देते हुए गाली गलौज और जान से मारने की धमकी दी। इससे पता चलता है कि अस्पताल संचालन किस स्तर पर किया जा रहा है और एक तथाकथित एम.बी.बी.एस डॉक्टर का एक निगरानी बदमाश से क्या संबंध है।

महत्वपूर्ण विषय यह हो सकता है कि निजी चिकित्सा संस्थान के संचालक दिलीप शर्मा और अभिनव की डिग्री सहित अस्पताल संचालन के ली गई अनुमति और प्रस्तुत दस्तावेज जांच का विषय है। इसी का फायदा निगरानी बदमाश उठा रहा था। और तो और अस्पताल में कार्यरत तथाकथित डॉक्टर भी गुंडागर्दी पर उतर आया। क्योंकि कहीं ना कहीं अस्पताल में कुछ तो ग़लत हो रहा है। पंरतु क्या अब पत्रकारों को समाचार संकलन की अनुमति भी गुंडे बदमाशों से लेनी पड़ेगी ?

यह देखने वाली बात होगी कि दीपक साहू जैसे गुंडों पर जिला और स्थानीय पुलिस प्रशासन क्या कार्यवाही करता है ?



