पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
आज 4 जून को शाम 7 बज रहे हैं। सुबह 8 बजे से मतों की गिनती पूरे देश में शुरू हुई थी और महज़ 11 घंटो में बहुत कुछ बदल गया है। अगले कुछ घंटों में और बहुत कुछ बदल जायेगा। लोकसभा चुनाव 24 के परिणाम घोषित होने शुरू हो गये है। आज सुबह के वोटों के रुझान अब परिणामों में बदलने लगे हैं। देश में सबसे बड़ी खबर वाराणसी, रायबरेली और वायनाड से आ रही है जहां प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी सीट जीत ली है और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को 1,52,000 से ज्यादा मतों से शिकस्त दी है।
वहीं कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने अपनी दोनों सीट रायबरेली और वायनाड से अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को करारी शिकस्त दी है। उत्तर भारत की हिंदी पट्टी में राहुल गांधी ने रायबरेली सीट पर 3,88,742 मतों से दिनेश सिंह को हराया है, दूसरी ओर दक्षिण भारत की वायनाड सीट 3,64,422 मतों से अपने निकटतम उम्मीदवार के. सुरेंद्रन से जीत ली है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी की जीत महज़ ढेड़ लाख मतों की है तो दूसरी तरफ राहुल गांधी ने दोनों सीटों पर साढ़े तीन लाख से ज्यादा अंतर से जीत दर्ज की है। ये जीत कहीं ना कहीं राहुल गांधी को विपक्ष का सबसे बड़ा और सर्वमान्य नेता बना देती है।
राहुल गांधी की दक्षिण से उत्तर तक भारत जोड़ो यात्रा और पूर्व से पश्चिम तक की भारत जोड़ो न्याय यात्रा का प्रतिफल है कि कि ना सिर्फ उन्होंने कांग्रेस की सीटों को दोगुना कर लिया बल्कि अपने गठबंधन को भी सत्ता के करीब तक ले आये। साथ ही एक जुदा अंदाज या एक परिष्कृत राजनेता का रुप में बदल गये राहुल गांधी अभी पत्रकार वार्ता से उठ कर रणनीति तैयारियों में शामिल होने रवाना हुए। बहुत ही सधे शब्दों में आम आदमी को संविधान बचाने के लिए धन्यवाद देना, सभी वर्गों को जोड़ कर अपने ऐजेंडे को देश के सामने फिर से खड़ा करना ये एक परिपक्व राजनेता के तौर पर उन्हें प्रदर्शित कर रहा है। ये अलग बात हो सकती है कि सत्ता का समीकरण अभी उनके पक्ष में नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी की कार्यप्रणाली से वाकिफ सभी लोग इस बात से सहमत तो हो ही सकतें हैं कि भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने की वजह से गठबंधन के साथियों के दबाव में वो असहज महसूस करेंगे और स्वतंत्र रूप से निर्णयों को नहीं ले सकेंगे। जिसका सीधा असर सरकार के कामकाज और भाजपा के अपने मूलभूत ऐजेंडे सहित प्रधानमंत्री मोदी की कार्यप्रणाली पर रहेगा। सब से बड़ी बात यह है कि क्या उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भाजपा को सीटों का बड़ा नुक़सान पार्टी की अंतर कलह को सामने ला दिया है? रामजन्म भूमि अयोध्या की लोकसभा सीट फैजाबाद भाजपा हार जातीं हैं। अमेठी से स्मृति ईरानी की हार सहित इन दोनों राज्यों में पचास से ज्यादा सीटों पर बड़ी हार क्या संकेत दे रहीं हैं? क्या सही में मोदी मैजिक खत्म हो गया है या क्षेत्रीय क्षत्रपों ने अपनी ताकत दिखा दी है? या कहें कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत “राम” अब मंदिर बनते साथ ही औचित्यहीन हो गया? प्रश्न अभी बहुत से होंगे? कुछ चिंतन में लिये जायेंगे तो शायद कुछ हमेशा के लिए अनुत्तरित रह जायेंगे? यक्ष प्रश्न तो यह है कि क्या मोदी का जादू खत्म हो गया?
भाजपा – 240 = NDA- 291
कांग्रेस – 99 = INDI- 233
शाम 7. 30 तक के आंकड़े है , इसमें बदलाव हो सकते है।



