रायपुर। पर्यटन, संस्कृति और पुरातत्व विभाग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की बीते दो वर्षों की अहम उपलब्धियों को साझा किया गया। इस दौरान पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर इस क्षेत्र में बड़े बदलाव की नींव रखी है। इसके चलते अब तक ₹500 करोड़ से अधिक के निजी निवेश का रास्ता साफ हुआ है, जिससे अधोसंरचना विकास, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
वही जानकारी देते हुए डॉ. रोहित यादव ने बताया कि श्रीरामलला दर्शन योजना के तहत 50 विशेष ट्रेनों के माध्यम से 42,500 से अधिक श्रद्धालुओं को लाभान्वित किया गया। वहीं होमस्टे नीति 2025–30 के जरिए ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिला है, जिससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
पर्यटन व्यवसाय पंजीकरण में बीते दो वर्षों में 10 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार हुआ है, जहां बोर्ड का मुनाफा ₹2 करोड़ से बढ़कर ₹10 करोड़ तक पहुंच गया है। इस अवसर पर सीटीबी के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य भी मौजूद रहे।
वही संस्कृति विभाग के एमडी विवेक आचार्य ने बताया कि संस्कृति और पुरातत्व के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। आरंग के रौवां पुरास्थल से करीब 2500 वर्ष पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जो प्रदेश के इतिहास को नई पहचान देते हैं। इसके अलावा विभिन्न जिलों में किए गए सर्वेक्षणों के दौरान शैलाश्रय और प्राचीन मंदिरों के अवशेष सामने आए हैं। राज्य में संरक्षित स्मारकों की संख्या अब बढ़कर 63 हो गई है, जिनमें हाल ही में 5 नए स्थलों को शामिल किया गया है।



