हरण बिस्वास
कांकेर। कांकेर जिले के पखांजूर इलाके में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। संवेदनशील क्षेत्र का बहाना बनाकर कई दिनों तक स्कूल न जाने वाले गुरुजी, अब हालात सामान्य होने के बाद भी स्कूलों से नदारद हैं।
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छोटेबेठिया क्षेत्र के कई गांवों में शनिवार को एक भी शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचा। ग्राम पंचायत कंदाड़ी के आश्रित गांवों की स्थिति और भी बदतर है। कंदाड़ी, आमाटोला और हिदूर जैसे गांवों में स्कूल केवल अतिथि शिक्षकों के भरोसे खोले गए है, जहाँ स्कुल से शासकीय शिक्षक नदारद रहे।
सरकार ने आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए नियमित शिक्षक नियुक्त किए हैं, बावजूद इसके शिक्षक मनमानी पर उतारू हैं। कई गांवों में बच्चों को पढ़ाने वाला कोई नहीं, स्कूल केवल कागजों में चल रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि शनिवार के दिन शिक्षक कभी स्कूल नहीं आते। निगरानी का अभाव और अधिकारियों का संरक्षण इस लापरवाही को बढ़ावा दे रहा है।
वही खंड शिक्षा अधिकारी जवाब देने मे बचते नजर आये ऐसे मे तो जंगल के बच्चों का भविष्य कौन संवारेगा?



