लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के घने जंगलों में सक्रिय 8 लाख की इनामी नक्सली कमांडर ऊषा उर्फ संगीता को अब बंदूक नहीं, बल्कि मां और भाई की करुण पुकार वापस बुला रही है। तेलंगाना के सैंड्रावेली गांव में बैठी बुजुर्ग मां मल्लाम और भाई आबूला गंगैया ने कैमरे के सामने हाथ जोड़कर ऊषा से नक्सल पथ छोड़कर घर लौटने की अपील की है।
यह भी पढ़े :- महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी का बवाल, कांग्रेस विधायक पर एफआईआर की मांग
ऊषा वर्तमान में गरियाबंद संगठन की डीवीसीएम (DVCM) है, लेकिन परिवार के लिए वह आज भी खोई हुई बेटी और बहन है। परिजनों ने कहा कि यदि समय रहते उसने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो अंजाम भयावह हो सकता है।
सरेंडर नक्सलियों की अपील, प्रशासन की डेडलाइन करीब
परिवार की अपील के साथ-साथ उन पूर्व नक्सलियों की आवाज भी गूंज रही है, जिन्होंने हाल ही में हथियार डाल दिए हैं। 24 लाख के इनामी सरेंडर नक्सली—जानसी (डीबीसीएम), सुनील (डीबीसीएम) और दीपक (एलजीएस कमांडर) ने ऊषा और बलदेव सहित अन्य नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। सरेंडर नक्सलियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति से उन्हें नया जीवन मिला है।
इनामी नक्सली बलदेव के परिजनों ने भी साफ कहा है कि अब लौट आने का यही सही वक्त है। प्रशासन द्वारा तय की गई डेडलाइन नजदीक है और गरियाबंद-नुवापाड़ा डिवीजन में सक्रिय ऊषा, बलदेव, अंजू और ज्योति पर सुरक्षाबलों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
परिजनों को डर है कि यदि समय रहते आत्मसमर्पण नहीं हुआ, तो परिवार के पुनर्मिलन का यह आखिरी मौका भी हाथ से निकल सकता है। यह सिर्फ नक्सलियों के सरेंडर की कहानी नहीं, बल्कि मां-बाप और परिवार की टूटती उम्मीदों और ममता की आखिरी पुकार है।



