रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दो बुजुर्ग बैगा आदिवासी महिलाओं को सरकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे जीवित हैं। इस गंभीर चूक के कारण न केवल उनका नाम राशन कार्ड से काट दिया गया, बल्कि उन्हें राशन और वृद्धा पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित कर दिया गया।
यह भी पढ़े :- कथित अश्लील कार्यक्रम पर पुलिस की सख्ती…
मामला लोरमी विधानसभा क्षेत्र के खुड़िया वन क्षेत्र और बंधवा गांव से जुड़ा हुआ है।
जीवित होते हुए भी ‘मृत’ घोषित
खुड़िया क्षेत्र के पथर्री गांव निवासी 70 वर्षीय बैगा आदिवासी महिला सहबीन बैगा को ऑनलाइन दस्तावेजों में मृत दर्शाया गया है। इसी तरह बंधवा गांव की एक अन्य बुजुर्ग महिला सूरजबाई के साथ भी यही स्थिति सामने आई है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड में मृत घोषित होने के कारण इन महिलाओं का नाम राशन कार्ड से हटा दिया गया, जिससे उन्हें पिछले तीन से चार महीनों से राशन नहीं मिल पाया।
चावल मांगकर गुजारा करने को मजबूर
राशन बंद होने के कारण सहबीन बैगा की स्थिति बेहद दयनीय हो गई। परिवार चलाने के लिए उन्हें आस-पास के लोगों से चावल मांगने तक की नौबत आ गई।
पीड़ित महिला ने बताया कि उसने कई बार गांव के सरपंच, सचिव और राशन दुकान संचालक को समस्या से अवगत कराया, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। राशन दुकान संचालक का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम में मृत दर्ज होने के कारण राशन देना संभव नहीं है।
पेंशन और योजनाओं से भी वंचित
ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र होने के कारण रोजगार के साधन पहले से ही सीमित हैं। ऐसे में राशन और पेंशन बंद होने से इन महिलाओं के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बताया जा रहा है कि पीड़ित महिला की दो बेटियां हैं, जिनमें से एक विधवा है। उसे न तो विधवा पेंशन मिल रही है और न ही महतारी वंदन योजना का लाभ। दूसरी बेटी को भी किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रशासन हरकत में, रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया शुरू
मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। तत्काल प्रभाव से पीड़ित महिला के घर दो बोरी चावल और नमक भिजवाया गया।
लोरमी एसडीएम ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी हाल ही में मिली है और पूरे प्रकरण को संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करता है कि जब जमीनी स्तर पर निगरानी नहीं होगी, तो सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक कैसे पहुंचेगा?
जीवित लोगों को मृत घोषित कर देना सिस्टम की एक गंभीर चूक है, जिसका खामियाजा गरीब और आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।



