रायपुर। लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का नियंत्रण और संचालन अधिकार छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ (CSCS) को सौंप दिया गया है। इस फैसले के साथ अब स्टेडियम का प्रबंधन, रखरखाव और विकास कार्य पूरी तरह संघ की ज़िम्मेदारी होगा। इससे माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में रायपुर में इंटरनेशनल मैच, टी-20 और आईपीएल मुकाबलों की मेज़बानी फिर से शुरू हो सकेगी।
सरकार ने तय किए तीन तरह के शुल्क
स्टेडियम की लीज के लिए सरकार ने तीन स्तरों पर शुल्क निर्धारित किए हैं–
वार्षिक शुल्क: ₹1.50 करोड़
मैच शुल्क:
प्रति आईपीएल मैच: ₹30 लाख
प्रति अंतरराष्ट्रीय मैच: ₹20 लाख
नॉन-क्रिकेट कार्यक्रमों पर: टिकट बिक्री का 10% सरकार को
इसके अलावा संघ ने स्टेडियम को अपग्रेड करने के लिए 50 करोड़ रुपए निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें नई लाइटिंग, एलईडी स्क्रीन, साउंड सिस्टम, और टूटी कुर्सियों को बदलकर स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
13 साल पुरानी मांग अब पूरी
यह स्टेडियम 2006 में बनना शुरू हुआ था और 145 करोड़ रुपए की लागत से 2008 में तैयार हुआ। लगभग 65,000 दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम 2010 में कनाडा की राष्ट्रीय टीम और छत्तीसगढ़ टीम के बीच मैच से उद्घाटित हुआ था।
स्टेडियम लीज प्रक्रिया के दौरान बिहार के राजगीर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, कर्नाटक के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम, और यूपी के ग्रीन पार्क स्टेडियम जैसे मॉडल्स का अध्ययन किया गया था। इन राज्यों में भी सरकार ने बाद में स्टेडियम का संचालन उनके राज्य क्रिकेट संघों को सौंप दिया था।
10 एकड़ जमीन भी दी गई लीज पर
स्टेडियम के बगल में स्थित खेल विभाग की 10 एकड़ भूमि पर क्रिकेट संघ को अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट अकादमी और क्लब बनाने की अनुमति दी गई है। पहले यह जमीन विभाग की बताई जा रही थी, लेकिन दस्तावेज़ जांच में यह एनआरडीए के नाम पाई गई। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इसे एनआरडीए से लीज पर संघ को ट्रांसफर कर दिया गया।
सरकार उठाएगी बिजली बिल का बोझ
स्टेडियम पर करीब ₹3 करोड़ की बिजली देनदारी बकाया थी। अन्य राज्यों में भी स्टेडियम सौंपने से पहले यही प्रक्रिया अपनाई गई थी, इसलिए यहां भी निर्णय लिया गया कि सरकार इस बकाया बिजली बिल का भुगतान करेगी।



